रात की जवानी अंगडाई ले रही थी ,
चांदनी चुपके से हम पे मुस्कुरा रही थी !
धड़कने होने लगी तेज एक दम से,
तनहइयो में आपकी याद जो आ रही थी !
तेरा इकरार तेरा रूठना तेरी प्यार की बातें,
उफ़ हम पे एक दीवानगी सी छा रही थी !
चुपके से लिपट गयी शर्म मेरे बदन से ,
जब तेरी नजरो से अपना सिंगार जर रही थी !
हवा के झोंके हमारे पास से गुजर रहे थे जैसे ,
मदहोशियाँ पास आने का रास्ता बना रही थी!
तेरी बाहें जो बनी मेरे गले की वरमाला ,
अंग अंग में मेरे तेरी खुशबू सी बिखर गयी !
मॉम जैसे पिघल कर तेरे प्यार की आग में ,
मैं खुद से बिछड़ कर तुम में शमा रही थी !
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Posted By Narpatanu "Ab Itne Arman Lekar Jaye Kaha" to Narpatanu at 3/06/2012 12:35:00 AM --
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