Monday, 20 February 2012

[Lovers India] jai shree krishna

 
:------भगवान श्रीकृष्णजी कहते हैं-------


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मैं अपने भक्तोंकी कठिन कठिन से परीक्षा लेता हूँ, 


मैं उनके मुख से एक एक दाना छीन लेता हूँ, 


उनका घर-परिवार छीन लेता हूँ, 


उनका प्रत्येक सुख-चैन मैं छिन लेता हूँ, 


मैं अपने भक्तों को आरों से कटवा देता हूँ, 


तते खम्बों से लिपटा देता हूँ, 


ऊंचे ऊंचे पर्वतों से गिरवा देता हूँ, 


मैं अपने भक्तों की परीक्षा लेने में कोई दया नहीं करता! 


मेरा भक्त फिर भी मेरा नाम नहीं त्यागता, 


मैं अनेकों जन्मों तक ऐसी परीक्षा लेता रहता हूँ, 


भक्त फिर भी मुझे नहीं छोड़ता,


मेरा ही भजन-नाम-ध्यान करता, 


बस मुझे ही सब कुछ मानता है, 


मुझे ही भजता है, 


मेरे नाम के सिवा उनको कुछ भी प्यारा नहीं लगता 


और मुझ पर ही अपना सब कुछ न्यौछावर कर देता है, 


तब मैं उसको दर्शन देता हूँ! 


मैं उसको अपने ह्रदय में स्थान देता हूँ! 


मेरी माया कभी भी उसके पास नहीं जाती,


मेरे ह्रदय में रह कर समस्त मेरी लीलाओं को देखता है, 


मैं उसे सब चिंताओं से मुक्त कर देता हूँ! 


मेरे भक्त को भूख-प्यास, गर्मी-सर्दी की चिंता नहीं करते, 


सोना-चांदी छल नहीं सकती, 


निद्रा उसे सताती नहीं, 


मेरे भक्त अपना सुख देकर


दूसरों के दुःख लेते हैं,


दूसरों को आराम की नींद सुला कर,


स्वयं रात-भर जागते रहते हैं! 


मेरे भक्त मुझ से भी बड कर


मुझ को प्यारे लगते हैं,


त्याग किया हो जिसने सारा 


मैं स्वयं उसको लेने आता हूँ! 


मैं अपने भक्तों की परीक्षा बार-बार लेने आता हूँ!










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